ब्रह्मांड (Universe)
समस्त अस्तित्व, जो अपने आधार के रूप में अनंत परिवर्तन पर टिका है। कोई स्थिर शासक या योजना नहीं — केवल अंतहीन प्रवाह, जिससे तर्क और प्राकृतिक विधियाँ स्वयं उभरती हैं और न्यायप्रिय समाजों का मार्गदर्शन करती हैं।
समस्त अस्तित्व, जो अपने आधार के रूप में अनंत परिवर्तन पर टिका है। कोई स्थिर शासक या योजना नहीं — केवल अंतहीन प्रवाह, जिससे तर्क और प्राकृतिक विधियाँ स्वयं उभरती हैं और न्यायप्रिय समाजों का मार्गदर्शन करती हैं।