दोष (Guilt)
किसी अन्य को उसकी इच्छा के विरुद्ध हानि पहुँचाने से उत्पन्न नैतिक ऋण। दोष कारणता से वस्तुनिष्ठ रूप से अस्तित्व में आता है, न कि भावनाओं, आरोप, या स्वीकारोक्ति से, और केवल न्याय के माध्यम से ही मिटता है।
किसी अन्य को उसकी इच्छा के विरुद्ध हानि पहुँचाने से उत्पन्न नैतिक ऋण। दोष कारणता से वस्तुनिष्ठ रूप से अस्तित्व में आता है, न कि भावनाओं, आरोप, या स्वीकारोक्ति से, और केवल न्याय के माध्यम से ही मिटता है।